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Uttar Pradesh / Kanpur : इलाज की आस में दिन भर तड़पने के बाद मिला अस्पताल,तब तक उखड़ गई सांसें निजी अस्पताल से परेशान होकर हैलट का रुख कर रहे बीमार

कानपुर के आसपास छोटे जनपदों के जिला अस्पताल की स्वास्थ सेवायें भगवान भरोसे है। अभी भी इलाज न मिलने या रेफर होकर बड़े शहरों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की अस्पताल पहुंचने से पहले ही सांसे थम जा रही है। शनिवार को फतेहपुर के खागा निवासी रमेश चौरसिया को उल्टी,दस्त और सीने में दर्द की दिक्कत पर जिला अस्पताल पहुंचे। बेटे अंकित ने बताया कि वहां पिता की हालत बिगड़ी देख हैलट रेफर कर दिया गया। परिजन एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाली सरकारी एंबुलेंस से लेकर हैलट अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने जांच करके मृत घोषित कर दिया। पति की मौत से बेसुध हुई पत्नी कमला अस्पताल की चौखट पर ही बैठकर रोने लगी और खुद को कोसने लगी।

गंभीर हालत देख खड़े किए हाथ

जूही,बारादेवी के रहने वाले कैलाश नारायण को शनिवार सुबह सांस लेने में परेशानी और उल्टी की समस्या हुई। बेटे दिनेश ने बताया कि हालत बिगड़ने पर पिता को एक निजी अस्पताल ले गए थे। जहां जांचे करने के बाद हैलट रेफर कर दिया। यहां उनको भर्ती करने के बाद इलाज शुरू हुआ।

इलाज के नाम पर दो दिन का बिल एक लाख

गुलमोहर विहार नौबस्ता के रहने वाले विक्रेंद्र सचान ने बताया कि उनके ससुर जर्नादन सिंह को बीते दिनों कोरोना संक्रमित हुए थे,जिस पर उनको जनपद हमीरपुर स्थित कुरारा के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। निगेटिव होकर आने के बाद फिर से हालत बिगड़ गई। शनिवार को पनकी पड़ाव स्थित एक निजी अस्पताल के महंगे इलाज से परेशान होकर परिजन इनको हैलट इमरजेंसी लेकर पहुंचे,जहां इनका इलाज शुरु हुआ। बुजुर्ग मरीज के दामाद के मुताबिक,निजी अस्पताल में मेरे ससुर का घटिया इलाज किया गया। दो दिन भर्ती रखने के बाद  ऊपर से एक लाख का बिल बना दिया  

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पीजीआई से निराश होकर लाए हैलट

कल्याणपुर आवास विकास तीन निवासी शेखर को किडनी और लीवर की बीमारी है। बेटे दिव्यांशु ने बताया कि पिता को कल्याणपुर न्यू शिवली रोड के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया था,जहां पर चार दिन में केवल अस्पताल परिसर में स्थित मेडिकल स्टोर से सत्तर हजार रूपये की दवाई मंगवा ली गयी,जब दवाइयों का बिल माँगा तो देने से इंकार कर दिया। हालत बिगड़ने इलाज से संतुष्ट न होने पर पिता को पीजीआई लखनऊ ले गए थे। वहां भी भर्ती नहीं किया गया। हैलट लेकर पहुंचने पर भी खबर लिखे जाने तक इनको भर्ती नहीं किया गया था।