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Uttar Pradesh / Kanpur : हाइवे हादसा किसी का सुहाग उजड़ा तो किसी के घर के बुझ गए चिराग तड़के तक तीन डॉक्टरों की टीम ने 17 शवों का कराया पोस्टमार्टम

मंगलवार की देर रात किसान नगर सचेंडी में हुए भीषण हादसे में 17 लोगों की मौत के बाद देर रात से ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हो गई। तड़के तक तीन डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम कराया। हादसे के बाद लोडर से पोस्टमार्टम हाउस भिजवाने वाले हैलट प्रशासन ने गलती सुधारते हए सभी शवों को एंबुलेंस से गांव भिजवाया। एक साथ 17 लोगों के शव गांव पहुंचते ही करुण-क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया। हर तरफ चीख पुकार ही मची थी। कई गांवों में चूल्हे तक नहीं जले।

सचेंडी हादसे में 17 लोगों की मौत के बाद देर रात से पंचायतनामा भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई। सचेंडी,नवाबगंज,कोहना,चमनगंज,बजरिया और काकादेव समेत नौ थाने के दरोगाओं को पंचायतनामा भरने के लिए लगाया गया। वहीं सीएमओ के निर्देश पर आननफानन तीन डॉक्टरों की टीम गठित कर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करवाई गई। बुधवार सुबह साढ़े सात बजे सभी का पोस्टमार्टम कराने के बाद जब एंबुलेंस से शव लालेपुर और ईश्वरीगंज पहुंचे तो परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। 

बड़े बेटे की जुलाई में होने थी शादी

लालेपुर के धनीराम पासी ने जब तीनों बेटों राममिलन (24),लवलेश (20 और शिवभजन (22) के शव देखे तो वो रो रोकर अपना संतुलन खो बैठे और बेसुध हो गए।पिता धनीराम ने बताया कि घर में इतनी आमदनी नहीं थी, इसलिए तीनों बेटे कम उम्र में ही कमाने लगे। राममिलन की शादी बिनगवां निवासी नीतू से जुलाई में तय की थी। गोदभराई हो गई थी। शादी की खरीदारी भी राममिलन ने खुद ही की थी। 

घर में कोई कमाने वाला भी नहीं बचा

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वहीं गांव के ही त्रिभुवन यादव भी बेटे धर्मराज (28) और गौरव (22) का शव देखकर रो रोकर बेहाल हो गए। 2 बेटों की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। घर में कोई कमाने वाला भी नहीं बचा। जानकारी पाकर पहुंचे रिश्तेदार और परिजनों को सांत्वना देकर ढांढ़स बंधाते रहे।

बेटा कहता था, कमाने जाऊंगा,टूटे घर को बनाऊंगा

हादसे में एक और पिता ने अपने जिगर के टुकड़े को खो दिया। शिवचरण (21) ने 6 महीने पहले ही पढ़ाई पूरी कर कमाना शुरू किया था। पिता कमलेश ने बुधवार को बताया कि काम नहीं मिला तो 280 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बिस्कुट फैक्टरी में काम करने लगा। कहता था कि कोरोना खत्म हो जाएगा तो बाहर कमाने जाऊंगा। टूटे घर को बनाऊंगा।

कन्यादान से पहले पिता की हो गई मौत

मृतकों में करन (45) भी शामिल है। उसके बेटे 17 वर्षीय बेटे विवेक ने बताया कि 2 बहनों की शादी होनी है। एक बहन काजल की शादी पिता ने तय की थी। 4 जून को शादी होनी थी,लेकिन लड़के के भाई का एक्सीडेंट हो गया तो शादी आगे बढ़ा दी गई। क्या मालूम था कि कन्यादान करने वाले हाथों का साया ही सिर से उठ जाएगा। बहन की शादी अब कैसे होगी? घर में पिता ही अकेले कमाने वाले थे।

पिता की मौत के बाद माँ के कंधों पर आई जिम्मेदारी 

मृतक उदय नारायण (55) के भाई लक्ष्मी नारायण ने बताया कि उदय की 4 बेटियां और 1 बेटा है। 2 बेटियों की शादी हो गई। मगर 2 बेटियों की शादी कोरोना के चलते नहीं कर सके। एक बेटी की गोदभराई और बरीक्षा हो चुकी है। एक लड़का कुलदीप हॉस्पिटल में एडमिट है। अब बच्चों की मां सावित्री के कंधों पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई है।