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Uttarakhand / Haridwar : गुरू ही शिष्य को ज्ञान की प्रेरण देकर कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं : श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह

श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल में गुरु पूर्णिमा पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान अखाड़े में स्थित गुरुद्वारे में शबद कीर्तन कर विश्व कल्याण की कामना की गई। इस अवसर पर श्रद्धालु संगत को संबोधित करते हुए निर्मल अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि अनादि काल से ही देश में गुरुओं का स्थान सबसे ऊंचा रहा है। गुरु ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं। गुरु ही अपने शिष्य को ज्ञान की प्रेरणा देकर उसके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरु अपने शिष्यों का संरक्षण कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं। ऐसी गुरु शिष्य परंपरा भारत को महान बनाती है। कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु की कृपा से ही व्यक्ति जीवन में सफलता को प्राप्त करता है। जो शिष्य अपने गुरुओं का सम्मान कर उनके बताए मार्ग पर चलते हैं। उनका जीवन सदैव ही उन्नति की ओर अग्रसर रहता है। उन्होंने कहा कि ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म सब गुरु की ही देन हैं। गुरु ही शिष्य की आत्मा का परमात्मा से साक्षात करवाता है। इसलिए सभी को गुरु के बताए मार्ग पर चलना चाहिए और सदैव गुरुओं का सम्मान करना चाहिए। इस दौरान महंत अमनदीप सिंह, महंत खेम सिंह, संत जसकरण सिंह, संत शशीकांत सिंह, संत निर्भय सिंह, संत सुखमन सिंह, संत रोहित सिंह, संत विष्णु सिंह, संत तलविंदर सिंह आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगत उपस्थित रही।

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