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छोटी काशी कहे जाने वाले बाबा बागनाथ की नगरी में दीपोत्सव के साथ माँ सरयू की भव्य आरती !

फोटो साभार- एड़ दिग्विजय सिंह जनौटी !!

कहते हैं आपने बनारस नहीं देखा तो क्या देखा और बनारस आकर अगर गंगा आरती नहीं देखी तो कुछ देखा ही नहीं। कहते हैं न काशी विश्वनाथ की नगरी की गंगा आरती की भव्यता की बात ही कुछ और है। लेकिन जिला प्रशासन व लोगों के प्रयासों से कुछ ऐसी ही कहावत छोटी काशी बागेश्वर में चरितार्थ होती नजर आ रही है। बागेश्वर के सरयू घाट पर बुधवार को हुई भव्य महाआरती का नजारा हरिद्वार या काशी से कमतर नही था, गंगा के दोनो छोर पर हुई भव्य आरती ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। छोटी काशी कहे जाने वाले बाबा बागनाथ की नगरी में दीपोत्सव के साथ माँ सरयू की भव्य आरती जो नजारा शाम को दिखा उसकी बात ही निराली है।
बुधवार शाम सरयू घाट पर मनोरम द्रश्य नजर आया। रंग बिरंगी रोशनी में नहाती माँ सरयू के तट पर महाआरती हुई।

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महाआरती सचमुच अद्भुत थी। आरती में शामिल होने के लिए घाट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सैंकड़ों की तादाद में लोग घाट पर नजर आए, वहीं पुल से गुजरने वाले वहां भी वहीं थम गए।

विगत लम्बे समय से बागेश्वर में अष्टमी की शाम दुर्गा व देवी पूजा महोत्सव की ओर से भव्य गंगा आरती, दीपदान तथा आतिशबाजी का आयोजन किया जाता है। आज भी भारी संख्या में भक्तों ने गंगा आरती में भाग लिया। सरयू किनारे जले दीपों से नगर मानो किसी दुलहन की तरह रोशनी में नहा गया हो। वहीं दूसरी तरफ सायं दुर्गा व देवी पूजा पंडालों में भक्तों ने मां दुर्गा की आरती वंदना की। सरयू के दोनों तटों पर दीप जलाकर भव्य दीपदान किया गया। दीपों की टिमटिमाती रोशनी में पूरा नगर रोशन हो गया। नदी के दोनों ओर भारी संख्या में लोगों की भीड़ दीपोत्सव को देखने उमड़ी। इसके बाद भव्य आतिशबाजी की गई। देर तक आसमान में जगमगाती रोशनी का दर्शकों ने जमकर आंनद उठाया।

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महोत्सव के आयोजकों ने कहा कि गंगा आरती के बाद दीपदान का हर साल आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि दीपक जलाने से जहां एक तरफ अंधियारा मिटता है, वहीं दीपक हमें अपने भीतर छिपे अंधकार रुपी बुराई को समाप्त कर अच्छाई रुपी रोशनी ग्रहण करने का संदेश भी देता है। हम लगातार इस आयोजन को और अधिक भव्य करने के लिए प्रयासरत हैं।

राजकुमार परिहार