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Uttarakhand: The Woods Retreat जयहरीखाल में श्रम कानूनों का उल्लंघन कर्मचारियों से 12-14 घंटे ड्यूटी, ओवरटाइम का भुगतान नहीं, बाहरी प्रबंधन द्वारा पहाड़ की जनता का शोषण; श्रम विभाग और प्रशासन से तत्काल जांच की मांग

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लैंसडाउन क्षेत्र के प्रसिद्ध The Woods Retreat रिज़ॉर्ट पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि यहाँ कर्मचारियों से श्रम कानूनों के विपरीत 12 से 14 घंटे तक ड्यूटी कराई जा रही है, जबकि उन्हें ओवरटाइम का कोई भुगतान नहीं किया जाता। यह रिज़ॉर्ट पिछले तीन वर्षों से संचालित है, परंतु यहां अब तक श्रम विभाग द्वारा कोई प्रभावी निरीक्षण नहीं किया गया है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों को न तो अतिरिक्त समय का वेतन मिलता है और न ही सप्ताहिक अवकाश। कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि वे अपनी परेशानी व्यक्त करते हैं, तो प्रबंधन उन्हें नौकरी से निकाल देने की धमकी देता है। इससे स्थानीय युवाओं में असंतोष फैल रहा है।

भारत के Factories Act, 1948 और Shops and Establishments Act के अनुसार किसी भी कर्मचारी से प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक कार्य नहीं कराया जा सकता, और यदि कराया जाता है तो धारा 51 एवं 13 के तहत ओवरटाइम का भुगतान अनिवार्य है। इन नियमों की खुलेआम अवहेलना The Woods Retreat में की जा रही है, जो श्रम कानून का सीधा उल्लंघन है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह रिज़ॉर्ट बाहरी लोगों द्वारा संचालित है जो उत्तराखंड के युवाओं का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। बेरोजगारी का फायदा उठाकर प्रबंधन कम वेतन में अधिक काम करवा रहा है। यह स्थिति न केवल कानून के विपरीत है बल्कि मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का भी अपमान है।

लोगों ने श्रम विभाग, श्रम मंत्री और जिलाधिकारी पौड़ी से मांग की है कि इस मामले की तत्काल जांच की जाए और दोषी प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, यह भी सवाल उठाया गया है कि तीन वर्षों से संचालित इस रिज़ॉर्ट का श्रम विभाग ने अब तक कोई औपचारिक निरीक्षण क्यों नहीं किया।

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स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं होती, तो वे श्रम विभाग कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे। “पहाड़ के लोगों को रोजगार चाहिए, शोषण नहीं,” यही आवाज अब जयहरीखाल की वादियों में गूंज रही है।