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क्या माइक्रोप्लास्टिक्स ने हमारे शरीर पर कब्जा कर लिया है?

प्लास्टिक प्रदूषण एक पुराना विषय है। लेकिन अतीत में, लोग केवल प्राकृतिक पर्यावरण को प्लास्टिक के नुकसान पर ध्यान देते थे, लेकिन आज प्लास्टिक्स के कण मानव शरीर में प्रवेश शुरू होने लगे हैं, जिससे मानव के स्वास्थ्य पर भारी प्रभाव पड़ता है। मार्च 2020 में, डच शोधकर्ताओं ने पाया कि मानव के रक्त में बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक्स मौजूद रहे हैं। और पिछले अध्ययनों ने बताया है कि माइक्रोप्लास्टिक्स मानव के “भ्रूण” तथा विभिन्न अंगों में भी मौजूद हैं। मामले को बदतर बनाने के लिए, नवजात शिशुओं में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा वयस्कों की तुलना में 10-20 गुना अधिक है, जिसका अर्थ है कि प्लास्टिक्स प्रदूषण का नुकसान बहुत गंभीर बना है।

शोध के आंकड़ों से पता चलता है कि एक आदमी हर दिन 7,000 माइक्रोप्लास्टिक का ग्रहण कर सकता है। माइक्रोप्लास्टिक पारंपरिक प्लास्टिक जैसे पॉलीविनाइल क्लोराइड से आता है, जिसका व्यास केवल लगभग 0.1 µm है, जो आंखों के लिए पूरी तरह से अदृश्य है। वे साधारण प्लास्टिक की तरह गैर-अपघट्य हैं, लेकिन वे मानव शरीर और पर्यावरण के लिए अधिक हानिकारक हैं। माइक्रोप्लास्टिक चुपचाप जीवित जीवों में आक्रमण करता है और हमेशा के लिए मौजूद हो सकता है। “माइक्रोप्लास्टिक्स” इस शब्द पर केवल हाल के वर्षों में ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन माइक्रोप्लास्टिक्स के खतरों को 50 से अधिक वर्षों पहले देखा गया। 1971 में, समुद्री जीवविज्ञानियों ने समुद्र में तैरते हुए बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक की खोज की। 2004 में, ब्रिटिश समुद्री जीवविज्ञानी रिचर्ड थॉम्पसन ने औपचारिक रूप से “माइक्रोप्लास्टिक्स” की अवधारणा का प्रस्ताव रखा। शोध के परिणाम बताते हैं कि माइक्रोप्लास्टिक्स ने महासागरों, जंगलों, वायु, जानवरों और पौधों, मानव भोजन और यहां तक कि मानव शरीर पर कब्जा कर लिया है। माइक्रोप्लास्टिक्स हर जगह मौजदू रहते हैं।

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मनुष्य हर साल सैकड़ों-हजारों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में फेंकते हैं, जो अंततः माइक्रोप्लास्टिक या नैनोप्लास्टिक बन जाएगा, और ये छोटे प्लास्टिक समुद्री जीवों के शरीर में प्रवेश करेंगे और अंततः मानव शरीर में भोजन के रूप में प्रवेश करेंगे। हमारे आस-पास सब कुछ प्लास्टिक से संबंधित है, जैसे टूथपेस्ट, टूथब्रश, प्लास्टिक की बोतलें और बाल्टी, कटलरी बॉक्स आदि। जहां भी प्लास्टिक होते हैं, वहां के हवा में माइक्रोप्लास्टिक कण होते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि मानव शरीर को माइक्रोप्लास्टिक का नुकसान अन्य जानवरों और पौधों की तुलना में कहीं अधिक है। मानव शरीर में, माइक्रोप्लास्टिक कण आंतों और अन्य स्थानों में जमा होते हैं। हालांकि कुछ माइक्रोप्लास्टिक कण उत्सर्जित हो सकते हैं, उनमें से अधिकांश शरीर में रहते हैं। इससे रक्तस्राव, मधुमेह, अवरुद्ध रक्त वाहिका और यहां तक कि कैंसर और प्रजनन संबंधी विकार जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।

यदि गर्भवती महिला के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक कण होते हैं, तो भ्रूण में भी यह होगा, और मां की तुलना में 10-20 गुना अधिक हो सकेगा। सभी प्रकार के बच्चे के कपड़े, दूध पिलाने की बोतलें, टेबलवेयर, खिलौने, खाद्य पैकेजिंग आदि, लगभग सभी प्रकार के शिशु उत्पाद प्लास्टिक्स उत्पाद से संबंधित हैं, और माइक्रोप्लास्टिक आसानी से बच्चे के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। खतरा यह है कि माइक्रोप्लास्टिक में निहित कुछ रसायन पदार्थ बच्चे के तंत्रिका तंत्र को नुकसान तथा बौद्धिक हानि जैसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन प्लास्टिक मानव शरीर के लिए इतना हानिकारक है, क्या हम प्लास्टिक का उपयोग कम कर सकते हैं? प्लास्टिक के बिना हमारा जीवन कैसा होगा? उधर टीवी, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, एयर कंडीशनर आदि जैसे सभी घरेलू उपकरणों में प्लास्टिक होता है। यहां तक कि पानी पाइप और बिजली के उपकरण भी प्लास्टिक का उपयोग करते हैं। कारों और अन्य वाहनों में प्लास्टिक होता है। प्लास्टिक के बिना, हम अब जीवित नहीं रह सकते।

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लेकिन जब हमने प्लास्टिक से मानव और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को पहचान लिया है, तो हमें प्लास्टिक कचरे के उत्पादन को कम करना चाहिए और प्लास्टिक के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी पर भरोसा करना चाहिए। उदाहरण के लिए, एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के उपयोग को कम करने से लाखों टन प्लास्टिक कम हो सकता है। खरीदारी करते समय अधिक कपड़े के थैलों का उपयोग करें, प्लास्टिक के तिनके के बजाय कागज के तिनके का उपयोग करें। वर्तमान में, दुनिया में प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग दर केवल 9% है। इस संबंध में सुधार की बहुत गुंजाइश है। साथ ही, प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए तकनीकी प्रगति पर भरोसा करना आवश्यक है। आर्थिक विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण प्रदूषण के प्रति हमें हाथ धो नहीं बैठना चाहिये अन्यथा, प्लास्टिक प्रदूषण अंततः हमें खुद को दंडित करेगा।

राजकुमार सिंह परिहार