News Cubic Studio

Truth and Reality

Uttar Pradesh / Lucknow : निर्मल मन को भगवान सदैव भाते है-मुक्तिनाथानन्द

राजधानी के रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष मुक्तिनाथानन्द के द्वारा वर्तमान स्थिति में निराशाजनक विचारों को दूर करने के लिए लोगों को सत् प्रसंग में बुधवार को बताया कि ईश्वर सबके भीतर सर्वदा विराजमान है, किन्तु साधारण मनुष्य भगवान की उपस्थिति अनुभव नहीं करते हैं। स्वामी ने कहा कि जब हमारे भीतर जागरूकता आ जाती है तब हम देखते हैं न केवल ईश्वर हमारे भीतर विराजमान है बल्कि वह सदा सर्वदा हमारी रक्षा भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दक्षिणेश्वर में रामकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर नरेंद्र नाथ ने एक संगीत प्रस्तुत किया। इसमें कहा गया है ओ! माँ अंतर्यामिनी, तुम मेरे हृदय में जाग रही हो रात-दिन मुझे गोद में लिए बैठी हो। जब हमारे भीतर यह जागरूकता आती है तब हम तनाव मुक्त हो जाते हैं। हम सदा निश्चिंत हो जाते हैं कि हम लोग भगवान के आश्रय में है। संगीत में आगे कहा गया है कि यद्यपि आपकी संतान अयोग्य है, आपके प्यार के लिए उसकी कोई योग्यता नहीं है तथापि आप अपनी संतान को कभी छोड़ती नहीं हो। कभी प्यार करके, कभी शासन करके आप ईश्वर की ओर हमें ले जाती हो एवं निरंतर प्यार के माध्यम से हमारा उद्धार करती हो क्योंकि आपका नाम ही पतितोद्धारिणी है। स्वामी  ने कि माँ शारदा कहती है कि अगर मेरी संतान गिरकर धूल में सन जाये फिर मेरी जिम्मेदारी है कि धूल से उसको उठाकर साफ-सुथरा करके गोद में उठा लेना अर्थात हमें सर्वदा याद रखना चाहिए हम कहीं पर भी हो, कुछ भी कर रहे हैं सर्वदा हम जगन्माता की निगाह में हैं। वह माँ बराबर हमारी रक्षा करेंगी और हमें आनंद में रखने के लिए वे सदा प्रस्तुत हैं। जब हम यह बात याद रखते हैं तब हमारा जीवन ईश्वर केंद्रित रहेगा एवं हम आनंद में भरपूर हो जाएंगे।

See also  Uttarakhand / Nainital: Demonstration of villagers for the dilapidated road of Ghorakhal Golju temple, expressing anger by standing on one leg