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“न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम न इधर के हुए न उधर के हुए”

अगर पिछले कुछ सालों की मोदी सरकार की विदेश नीति पर बात करें तो हमें यही समझ में आएगा कि वाकई में स्थिति बहुत गंभीर है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भारत की अस्पष्ट स्थिति भारत की छवि को एक कमजोर राष्ट्र कि बनाती है। जिसका उदाहरण रूस यूक्रेन युद्ध है, जिसमें भारत के रुख से बहुत से यूरोपियन देश नाराज हैं। इसके बाद अगर बात पड़ोसी देशों से रिश्तो की हो तो वह भी बीते कुछ सालों में कमजोर हुए हैं अगर। अरब देशों की बात की जाए तो पिछले कई दशकों से भारत के रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं मगर जिस तरह से भारत के अंदर लगातार मुस्लिम समाज को टारगेट किया जा रहा है और हालिया प्रकरण में भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा पैगंबर मोहम्मद साहब के ऊपर की गई अमर्यादित टिप्पणी हो उससे अरब देशों में भयंकर नाराजगी देखी गई है। कई देशों ने भारत का समान का बहिष्कार शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया की बात करें तो कई ऐसे वीडियो आए हैं जिसमें दिखाया जा रहा है कि अरब देशों से वहां काम कर रहे भारतीयों ने पलायन शुरू कर दिया है। यही नहीं ऐसे समय में जब देश में बेरोजगारी चरम पर है और लोगों के छोटे-मोटे काम भी बंद होने की स्थिति में आ गए हैं ऐसे में भारत से हो रहे खाद्य पदार्थों गेंहू, चायपत्ती को गुणवत्ता के मापदंड पर खरा ना उतरने के कारण तुर्की, मिस्त्र, ईरान और ताइवान जैसे देशों ने वापस भेज दिया है, जिसका सीधा असर भारत की छवि पर पड़ा है जिसके कारण कई और देश भी इस सूची में शामिल हो सकते हैं ।

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आज विश्व पटल पर राजनीतिक बदलाव बहुत तेजी से हो रहे हैं उन बदलावों का सही आकलन मोदी सरकार करने में विफल रही है। इसका परिणाम यह हुआ है कि आज हमारे पुराने सहयोगी देश हम से दूरियां बना रहे हैं और जिन नए दोस्तों में भारत अपना भविष्य तलाश रहा है उनका इतिहास दोस्ती निभाने के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा है। इन सभी स्थितियों का खामियाजा अंततः भारत की उस जनता को उठाना पड़ रहा है जिसने जबरदस्त बहुमत से मोदी जी को सत्ता सौंपी थी। जिन उम्मीद के रथ पर सवार होकर भारत की देव तुल्य जनता ने भाजपा को वोट दिया था आज उस जनता की अपेक्षा में मोदी सरकार असफल साबित हो रही है। अगर बहुत जल्द मोदी सरकार ने इन बिगड़ रही स्थितियों को काबू में नहीं किया तो इसके बहुत बुरे परिणाम भारत की जनता को झेलने पढ़ सकते हैं।

सत्यनवेशी