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कैसे लगे बलात्कार पर रोक?

यूपी के उन्नाव में एक 11 साल की बच्ची पांच दरिंदो का शिकार होती है,रेप से 7 माह में एक बच्चे को जन्म देती है. पांच में से 2 आरोपियों को क्लीन चिट मिलती है और 2 जमानत पर रिहा होते हैं. बच्ची का सातवे माह में जन्मा बच्चा अब 3-4 महीने का है. जमानत पर छूटे रेपिस्ट सहित 7 लोग पीड़ित के घर पहुंचकर रेप सर्वाइवर बच्ची और उसकी मां के साथ मार पीट करते हैं घर में आग लगा देते हैं. आग में वह 3-4 माह का बच्चा और इतनी ही आयु की बच्ची जो कि रेप सर्वाइवर की बहन थी, बुरी तरह झुलस जाते हैं. पीड़ित पक्ष इतना लाचार था कि इलाज के लिए पैसे तक नहीं थे. तस्वीरें बहुत विचलित करने वाली थीं.  घटना पिछले साल अप्रैल या मई की है. क्या ये निर्भया केस से कम डरावना था?

यह सिर्फ़ एक मामला है हाथरस, हरियाणा में साधु वेश में 4 साल की सोई हुई बच्ची को घर से ले जाकर दुष्कर्म, उज्जैन, BHU की छात्रा, मणिपुर चीरहरण, ढाई साल की बच्ची से दुष्कर्म, दो बच्चियों को पेड़ पर लटकाना, उनके पिता की आत्महत्या,  हाल ही की बात है. ऐसे न जाने कितने मामले हैं, जो वायरल होते हैं सिर्फ़ उनकी ही जानकारी होती है. हालात इतने खराब हैं कि ICU में बीमार पड़ी महिला (राजस्थान) और यहां तक कि लाशों के साथ भी दुष्कर्म हो रहे हैं.

एडल्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट कोई भी फैसला सुना दे लेकिन 12 साल की आयु तक बच्ची सहमति की स्थिति में नहीं होती. उनकी शारीरिक, मानसिक क्षति का कोई अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता. इस तरह के केस में सजा चौराहे पर लटकाने से कम नहीं होनी चाहिए. बिना जाति धर्म देखे दो चार को सरेआम फांसी दे दी जाए तो सुधार की गुंजाइश होगी. 12-17 की नाबालिक लड़कियों के मामले में रेप से जन्मे बच्चों की जवाबदेही रेपिस्ट या उसके परिवार पर होनी चाहिए.

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पुलिस को स्पष्ट निर्देश को कि माइनर मामले में बिना टालमटोल और बदसलूकी किए एक्शन लें. विधायिका और न्यायपालिका अगर इतना भी नहीं कर सकते तो संस्कारों की रक्षा,महिला सुरक्षा और सम्मान का ढोल पीटना बंद कर दें…!!

योगिता भयाना