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चीन मुह चिड़ा रहा है, साहिब धर्म की राजनीति पर व्यस्त

पूर्व की तरह एक बार फिर इन दिनों चीन चर्चाओं में हैं। हमारे प्रधानमंत्री जिस मसले पर कुछ समय पहले ही चीन को क्लीन चिट जारी कर चुके हों उस मसले पर अमेरिका के पेंटागन की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा में करीब 4.5 किमी अंदर घुसकर एक गांव बसा लिया। जिसमें 101 घर नजर आ रहे हैं। उनमें कई दो तीन मंजिला भी हैं । जिससे देशवासियों की चिंता बढ़ी है । चीन का यह गांव अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के गांव त्सारी चू गांव में बसाया गया है। अब किस पर विश्वास करें समझ से परे है। रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री इस विषय पर मौन हैं। अंध भक्त इसे अमेरिका की झूठ बता रहे हैं। आखिरकार चीन पर चुप्पी क्यों, साहिब को जवाब देना चाहिए पर वो तो आजकल धर्म की राजनीति पर व्यस्त नजर आ रहे हैं। अब आप, हम और देश की ज़िम्मेदारी फिर एक बार राम भरोसे नजर आ रही है।

चीन की मीडिया लगातार कह रही है कि पिछले जून के #गलवान संघर्ष की नई तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, जिसमें चीनी पीएलए द्वारा आत्मसमर्पण करने वाले भारतीय सैनिकों को दिखाया गया है। भारतीय सैनिकों ने नई-नई सहमति का उल्लंघन किया और चीनी कर्मियों के खिलाफ भड़काऊ हमले शुरू किए, जिससे गंभीर शारीरिक संघर्ष हुए।

असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट करते हुये लिखा है “अगर ये तस्वीरें सच हैं तो @PMOIndia के पास जवाब देने के लिए बहुत कुछ है। लद्दाख में हमारे सैनिकों के बलिदान का सम्मान करने के बजाय, मोदी ने चीन के दावे को बरकरार रखा (ना कोई घुस है..) उनका सारा स्वैगर घरेलू दर्शकों के लिए है। कब्जे वाली जमीन की वसूली तो भूल ही जाइए, उन्होंने चीन का नाम तक नहीं लिया है। कमजोर पीएम”

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वहीं कांग्रेस ने शनिवार प्रेस कॉन्फ्रेंस पर केंद्रीय कानून मंत्री रिजिजू ने ट्विटर पर दावा किया और लिखा “प्रिय कांग्रेसियों, चीन सीमा मुद्दे पर बोलने से पहले कांग्रेस सरकार के रक्षा मंत्री की बात सुनें। कुछ दुर्भावनापूर्ण मीडिया ने लिखा है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के भीतर एक गांव बसा लिया है और फिर उस इलाके का थोड़ा-सा जिक्र किया है जहां चीन ने 1959 में कब्जा जमा लिया था। आपका मकसद क्या है?” चोरी और सीनाजोरी वह भी खुल्लमखुल्ला। पी एम भी शान से कहते नहीं थकते, न चीन घुसा था और न घुस आया है। जबकि इस खबर को भारतीय अखबारों ने भी पहले ख़ूब छापा कि “पिछले साल (2020) से अरुणाचल क्षेत्र में एलएसी के साथ चीनी गतिविधियों में तेज वृद्धि हुई है, मिगीटुन शहर के पास त्सारी नदी पर निर्मित आवासीय आवास और संचार सुविधाओं में वृद्धि हुई है, जिसे उन्नत सड़क संपर्क भी मिला है।” लेकिन चीन को क्लीनचिट दी गई। पत्रकारों और नेताओं को झूठा साबित किया गया। फिर कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह बताया है कि चीन अब गलवान घाटी में पांव जमाने के बाद तथा अरुणाचल में गांव बसाने के बाद सिलीगुड़ी कारीडोर के करीब फिर इसी तरह के काम में जुट गया है यह बात आज मीडिया के माध्यम से ईस्टर्न आर्मी कमांड के JOC के हवाले से मिली जिसमें बताया गया कि चीन यहां भी सड़कों का जाल बिछा रहा है। चुंबी वैली में चीन कनैक्टीविटी बढ़ा रहा है। अधोसंरचना कर रहा है, ऑप्टिकल फाइबर का नेटवर्क बिछा रहा है। उनका ये भी कहना है कि ड्रैगन के इरादे नेक नहीं है।

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कांग्रेस ने मीडिया को कहा कि इस मुद्दे पर बात करना इसलिये भी जरूरी है क्योंकि यह सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण है। चीन के इन हरकतों से सिलिगुड़ी कोरिडोर खतरे में आ गया है. उन्होंने कहा कि याद दिला दें कि पिछले 18 महिनों में चीन ने अलग अलग तरीके से घुसपैठ किया है. पिछले महीने उत्तराखंड में चीन ने पुल तोड़ दिया था। मतलब चीन भारत से लगी तमाम सीमाओं में घुस कर तथाकथित विकास सामयिक दृष्टि से कर रहा है और हमारी चुप्पी का पूरा फायदा उठा रहा है।

कांग्रेस ने कहा इसके अलावा चीन भूटान से बातचीत करता है और भारत सरकार चुप रहती है। चीन श्रीलंका में बंदरगाह ले लेता है और मालदीव में द्वीप ले लेता है और सरकार चुप रहती है। चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को हथिया लेता है और सरकार चुप रहती है, ऐसा क्यों?

याद करिए फ़रवरी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लद्दाख से चीनी सेना की वापसी पर सवाल किया था। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया है कि वो डरपोक हैं और उन्होंने देश की पवित्र जमीन को चीन को सौंप दिया है. कांग्रेस नेता का सवाल था कि पेगांग सागर में भारतीय सेना की जगह जो पहले फिंगर 4 पर थी, सरकार ने उसे अब फिंगर 3 पर सहमति क्यों दी? प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने भारत की जमीन को चीन के हवाले क्यों किया?

राहुल गांधी का यह सवाल आज तक अनुत्तरित है। लद्दाख के भाजपा सांसद की चीनी घुसपैठ की आवाज भी संसद में दबाई गई उसके बाद सीमा उल्लंघन के अनेक सवाल उठे लेकिन वही ढाक के तीन पात। अब तो सीमा के अंदर घुसकर गांव के नाम पर फौजी छावनियां तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस बन गई हैं, और बनती जा रहीं हैं। तो रह रह कर एक सवाल ही मन में आता है कि कहीं इस व्यापारी सरकार ने भारतभूमि का ये हिस्सा चीन को बेच तो नहीं दिया जिसकी पटकथा साबरमती के झूला पर बैठकर लिखी गई। हमारे जांबाज सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में रहकर तथा कारगिल और नेफा हमले में अपनी जान देकर जो ज़मीन सुरक्षित रखी, उसी पर चीन हमारी वर्तमान कमज़ोर सरकार का फायदा ले रही है। अगर पेंटागन रिपोर्ट गलत हो तो उनसे सवाल सरकार क्यों नहीं करती ? कांग्रेस को भी जवाब दो। देशवासियों को भी बताओ। दाल में ज़रुर काला है। जय जवान और जय किसान का नारा आज इस सरकार ने खोखला कर दिया है। यू ए पी ए का जिस तिस पर इस्तेमाल करने पर सुको रोक लगाए ताकि असलियत उजागर हो।

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आज फिर एक बार वही हालात सामने आ रहे हैं आंखिर देश की जनता को गुमराह क्यों और किसके कहने पर किया जा रहा है ? जवाब तो देना होगा। इस पूरे मुद्दे पर सोशल मीडिया ए घमशान चल रहा है पर हमारी मेन स्ट्रीम मीडिया से यह पूरा मामला गायब है।

राजकुमार सिंह परिहार