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जानिए 15 जून को आखिर कैसे उस हिंसक झड़प में भारत ने अपने 20 जवान खो दिए ?

भारत की ओर से कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू चीनी पक्ष से सेनाएं हटाए जाने को लेकर बीतचीत में शामिल थे। वे झड़प के एक घंटे पहले तक चीनी सेना से बात कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक सोमवार सुबह हुई बातचीत के बाद सहमति बनाई गई थी कि चीनी सेना भारतीय क्षेत्र से हट जाएगी।

अचानक बड़ी संख्या में लौटे चीनी सैनिक
कमांडिंग ऑफिसर करीब 50 जवानों की पार्टी के साथ स्टैंडऑफ पॉइंट का जायजा लेने गए थे। वह यह देख रहे थे कि वादे के मुताबिक चीनी सैनिक वापस गए हैं या नहीं लेकिन चीन ने एक बार फिर चालबाजी की। भारतीय सेना जब LAC के इस ओर अवैध रूप से बनाए चीनी ढांचे तोड़ रही थी, तभी बड़ी संख्या में चीनी टुकड़ी वापस आ धमकी। सूत्रों के मुताबिक करीब 250 चीनी सैनिक पेट्रोल पॉइंट 14 पर जमा हो गए। इन लोगों को भारतीय जवानों ने भारत की सीमा में घुसने से रोका। तभी कांटेदार डंडे लेकर चीनी सैनिकों ने उन पर हमला कर दिया।

उफान पर बह रही गलवान नदी में बहे जवान
दोनों सेनाओं के बीच यह झड़प गलवान नदी के बीच में हो रही थी। गलवान नदी इस वक्त में उफान पर है और तेज धारा में बह रही है। इस वजह से बड़ी संख्या में सैनिकों की जान चली गई क्योंकि घायल होने पर वे नदी में बह गए। भारतीय सैनिकों को PP14 पर पहुंचने के लिए 5 जगहों पर गलवान नदी को पार करना पड़ता है। PP14 ही LAC को मार्क करता है। पहले कर्नल संतोष समेत 3 भारतीय जवानों के शहीद होने की खबर थी। फिर सेना ने बताया कि सब-जीरो तापमान वाले इलाके में घायल जवान भी शहीद हो गए।

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चीन ने LAC बदलने की कोशिश की : भारत

चीन के 43 सैनिक हताहत
इस झड़प में चीन को भी भारी नुकसान हुआ है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक चीन के सैनिकों के बीच बातचीत से पता चला है कि उसके 43 सैनिक हताहत हुए हैं। इनमें से कई मारे गए हैं और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि चीन की तरफ से इस बार में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन चीनी खेमे में घायलों को ले जाने आए हेलिकॉप्टर देखे गए हैं।

झड़प पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन को सख्त लहजे में जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अगर चीन ने हाई लेवल पर बनी आपसी सहमति का ध्यान रखा होता तो दोनों तरफ के सैनिकों की जान नहीं जाती।

एकतरफा कार्रवाई पर विदेश मंत्रालय की चीन को दो टूक विदेश मंत्रालय ने मंगलवार शाम करीब 8.15 बजे बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा- 15 जून की रात चीन के सैनिकों ने लद्दाख में मौजूदा हालात को बदलने की एकतरफा कार्रवाई की। इसके चलते दोनों पक्षों में हिंसक झड़प हुई।
“दोनों पक्षों को नुकसान हुआ है। इस नुकसान को टाला जा सकता था, अगर चीनी पक्ष ईमानदारी से हाई लेवल पर बनी सहमति का पालन करता।

मंत्रालय ने कहा- बॉर्डर मैनेजमेंट को लेकर भारत का नजरिया बेहद जिम्मेदाराना रहा है। भारत की गतिविधियां हमेशा एलएसी के दायरे के भीतर ही होती हैं। हम चीन की तरफ से भी ऐसी ही उम्मीद करते हैं।
हम मानते हैं कि सीमाई क्षेत्रों में शांति बनाए रखना जरूरी है। मतभेद हों तो उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाया जाए। लेकिन, हम मजबूती से यह बात साफ करना चाहते हैं कि हम भारत की संप्रभुता और अखंडता को लेकर प्रतिबद्ध हैं।

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गालवन की कहानी:
1962 की जंग में गालवन घाटी में गोरखा सैनिकों की पोस्ट को चीनी सेना ने 4 महीने तक घेरे रखा था, 33 भारतीय शहीद हुए थे।
दुनिया की सबसे लंबी अनसुलझी भारत-चीन सीमा पर 1967 के बाद से एक भी गोली नहीं चली, लेकिन 1986 के 27 साल बाद 2013 से फिर होने लगे विवाद।

हमारे देश में लोकतंत्र है इसलिए हम बता देते हैं, लेकिन चीन कभी नहीं बताएगा कि उसके कितने सैनिक मारे गए हैं।