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गंगोत्री का ड्रामा

⏺️ तीरथ सिंह रावत का जाना तय। तो आगे लावारिश राज्य का कौन ख्वामख्वाह होगा.?
⏺️ उत्तराखण्ड को मिलेगा नया मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति शासन के लिए रहे तैयार.?
⏺️ विपक्ष पूरे राजनीतिक मूड में सत्ता पक्ष अंदरूनी झमेले में उलझी।

गंगोत्री उपचुनाव विपक्ष को बना बनाया बिरयानी मिल गया उस में सालन का काम आम आदमी पार्टी ने कर दिया। सभी पार्टियां भलीभांति जानती हैं उत्तराखण्ड में उपचुनाव संभव नही हैं। फिर भी सत्तारूढ़ को गंगोत्री उपचुनाव के नाम पर घेर रही हैं। कर्नल कोठियाल भी इस खेल में कूद पड़े तीरथ सिंह रावत दिल्ली देहरादून के मध्य किसी ढाबे पर चखना का स्वाद ले रहे हैं।

सभी राजनीतिक पण्डित जानते हैं उत्तराखण्ड में उपचुनाव नही हो सकता तो तीरथ सिंह रावत की विदाई होनी तय हैं उत्तराखण्ड में विधानपरिषद नही हैं इस लिए अब कोई लाइफलाइन नही रही सभी लाइफलाइन खत्म होने के बाद राष्ट्रपति शासन या विधायक दल का नया नेता उत्तराखण्ड में नए समीकरण पर विराम लगा सकता हैं हालांकि अभी तक नए मुख्यमंत्री के ड्रामा से BJP को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा हैं योगी मोदी की लड़ाई में पार्टी 70 सीटों वाले उत्तराखण्ड को भूल गई। इतना अहम फैसले में भारी लापरवाही कैसे हो सकती हैं। राजनीतिक पण्डित साल्ट चुनाव तक तीरथ सिंह को सुरक्षित रख इस को कोई नया खेल मान रहे थे किंतु यह पार्टी हाईकमान की भारी चूक थी आज अहसास हुआ।

त्रिवेन्द्र सिंह को तीरथ सिंह से रिप्लेस बेहतर निर्णय था पहाड़ी समाज को जख्म भूलने की आदत हैं वो पुराने घाव पर मिट्टी डाल नई उम्मीद लिए बैठे थे किंतु अब सब्र 2022 के चुनाव में दिखेगा। बार-बार महामंडलेश्वर बदल जाने से अखाड़े में असमंजस की स्थिति बन गई हैं जिस का खामियाजा सत्तारूढ़ जरूर भुगतेगी।

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विपक्ष पूरे राजनीति मूड में हैं किंतु जनता यह तय नही कर पाई की हम विपक्ष किस को माने आम आदमी पार्टी या उत्तराखण्ड क्रांति दल या फिर कोंग्रेस को। फिलहाल इन तीनों पार्टीयों में विपक्ष कहलाने के लिए दौड़ हैं। यह भी संभव हैं कि इन में से किसी एक पार्टी को अन्य का नाम मिल सकता हैं। तीसरा विकल्प कौन बनेगा अभी यह समय की गर्त में हैं खोज इस की हैं कि चुनाव आने तक tv डिबेट में विपक्ष कौन बनेगा।

चुनाव आयोग नियम के अनुसार यदि किसी राज्य में चुनाव होने है तो एक वर्ष के भीतर उपचुनाव नही होते। किसी वजह से यदि सीट खाली रह गई तो चुनाव नही कराए जाते हैं। फरवरी 2022 में चुनाव होने हैं मार्च तक राज्य को नई सरकार मिल जाएगी ऐसे में गंगोत्री का उपचुनाव संभव नही। सभी राजनीतिक पार्टियां जनता को गुमराह कर रही हैं जिस का पूरा फायदा कर्नल कोठियाल टीम उठा रही हैं आज फौजी ने जानबूझकर गंगोत्री उपचुनाव में तीरथ सिंह के खिलाप लड़ने का फैसला लिया ताकि मनोवैज्ञानिक दबाव बना सके। ताकि जनता के मन में एक आदर्श दिलेर व्यक्ति की छबि बन सके। जिस जाल में BJP फंस गई और दिल्ली देहरादून परेड हो गई। देहरादून दिल्ली के हाईवोल्टेज ड्रामा ने प्रदेश वासियों के पेट में कुल्च कुल्च करा दिया। पार्टी जानती हैं तीन तलाक राम मन्दिर जाती धर्म हिन्दू मुस्लिम का पैंरता पहाड़ों में नही चलेगा इस लिए विकास की बात विकास पुरूष ही करे तो सही हैं जिस की जिम्मेदारी कर्नल कोठियाल को सौंपी हैं इस के चक्कर में BJP बौखलाई हैं जिस AAP को कोंग्रेस के वोट काटने वाली पार्टी कहा जा रहा था वह आज पैरासिटामोल खपत करा रही हैं हालांकि यदि आज चुनाव होते हैं तो आम आदमी पार्टी मात्र 10 से 12 प्रतिशत वोट की दावेदार हैं। पर भविष्य क्या जाने क्या होता हैं। BJP भी वैशिक मुद्दे छोड़ विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ने जाएगी पर जनता के बीच कहेगी क्या जनता से किये वादे पूरे हुए नही तो अब क्या नया बताएगी।

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देवेश आदमी