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Uttarakhand / Haridwar : शिव आराधना के साथ प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देता है श्रावण मास : आचार्य स्वामी कैलाशानंद गिरी

निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा है कि महादेव की आराधना से व्यक्ति में उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। जिससे वह स्वयं को सबल बना कर अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। नीलधारा तट स्थित श्री दक्षिण काली मंदिर में संपूर्ण श्रावण मास चलने वाली विशेष शिव आराधना के छठे दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि भगवान शिव की आराधना व्यक्ति की आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाती है। जो दीन दुखी दीनानाथ के दरबार में आ जाता है। उसका जीवन स्वयं ही सफल हो जाता है। श्रावण मास में की गई शिव आराधना भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण करती है। आचार्य स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि श्रावण का पवित्र मास शिव आराधना के साथ ही हमें प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन काल में वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए। मानव और प्रकृति के बीच संतुलन के लिए पौधारोपण अति आवश्यक है। शिव भक्तों के लिए सावन का महीना सबसे प्रिय होता है। सावन के महीने में पूजा अर्चना करने से भगवान शिव बहुत जल्द प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। क्योंकि भगवान कण-कण में विराजमान है और अत्यंत कल्याणकारी हैं। आचार्य स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि बेलपत्र में संसार के समस्त दैहिक दैविक और भौतिक तत्वों को हरने की क्षमता होती है। जो श्रद्धालु भक्त नियमित रूप से शिवलिंग पर जल धारा के साथ बेलपत्र अर्पित करता है। भगवान उसके जन्म जन्मांतर के पाप हर लेते हैं और मृत्यु के बाद वह व्यक्ति शिव गणों के साथ शिवलोक का आनंद प्राप्त करता है। भगवान को बेलपत्र अर्पित करने से सारे तीर्थों की यात्रा का फल मिलता है। इस दौरान समाजसेवी संजय जैन, पुनीत जैन, आचार्य पवन दत्त मिश्र, अवंतिकानंद ब्रह्मचारी, पंडित प्रमोद पाण्डे, लालबाबा, कृष्णानंद ब्रह्मचारी, बालमुकुंदानंद ब्रह्मचारी, विवेकानंद पाण्डे आदि मौजूद रहे।

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