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Uttarakhand / Haridwar : दृढ़ इच्छाशक्ति व प्रशासनिक क्षमता का परिचय देते हुए कांवड़ मेला संपन्न कराए सरकार: नीरज सिंघल 

कांवड़ मेला कराने की मांग को लेकर व्यापारियों ने किया डमरू बजाकर प्रदर्शन

कांवड़ मेला कराने की मांग को लेकर व्यापारियों ने प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले हाथों में भगवान शिव की प्रतिमा व डमरू बजाकर अपर रोड़ पर प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने मांग की कि सरकार को हिन्दू श्रद्धालुओं की भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए कांवड़ मेला संपन्न कराना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष डा.नीरज सिंघल ने कहा कि उत्तराखंड सरकार व प्रशासन को व्यापारी हित एवं हिंदू हित में अपने निर्णय पर पूर्ण विचार करना चाहिए। नीरज सिंघल ने कहा कि लंबे लॉकडाउन के बाद कोरोना के नाम पर कांवड़ मेले को निरस्त किया जा रहा है। वर्तमान में कोविड की स्थिति पहले से बहुत बेहतर है। कोविड के मामले लगातार कम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार दो वर्ष से चारधाम यात्रा व कांवड़ मेला निरस्त किया जा रहा है। जबकि यह सर्वज्ञात है कि उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था पूरी तरह धार्मिक पर्यटन पर आधारित है। चारधाम यात्रा व कांवड़ मेले में भाग लेने के लिए देश भर से करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। जिससे व्यापार को गति मिलती है तथा सरकार को भारी राजस्व मिलता है। लेकिन लगातार दूसरे वर्ष चारधाम यात्रा के साथ कांवड़ मेला भी निरस्त कर दिया गया। जिससे कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन व बाजार बंदी के चलते विषम आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रहे व्यापारी वर्ग की उम्मीदों को झटका लगा है। प्रशासन को विधिवत रूप से कांवड़ मेले को संपन्न करवाकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रशासनिक क्षमता का परिचय देना चाहिए। प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला महामंत्री संजय त्रिवाल ने कहा हिंदू की बात करने वाली सरकार सावन मेला स्थगित करके हिंदू समाज को क्या संदेश देना चाहती है। त्रिवाल ने कहा जब उत्तर प्रदेश सरकार ने कावड़ मेला 25 जुलाई से करने के आदेश दिए हैं, तो उत्तराखण्ड सरकार को भी इस पर विचार करना चाहिए। उत्तराखण्ड सरकार व प्रशासन द्वारा कोरोना महामारी के नाम पर कांवड़ मेले को स्थगित करने के निर्णय से व्यापारियों वे शिव भक्तों को निराशा हुई है। लगातार दो वर्ष से मंदी का सामना कर रहे व्यापारियों को कांवड़ मेला होने पर बेहतरी की उम्मीद जगी थी। कांवड़ मेला स्थगित होने के बाद व्यापारी स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों को तो प्रति माह वेतन मिल रहा है। बार बार मांग करने के बावजूद सरकार व्यापारियों को किसी प्रकार की कोई मदद नहीं दे रही है। ऐसे में व्यापारी किसके आगे हाथ फैलाएं। त्रिवाल ने कहा कि जब प्रशासन कांवडिय़ों को रोकने के लिए 10 टीम बना सकता है। तो 10 टीम बनाकर मेला भी सम्पन्न कराया जा सकता है। प्रदर्शन करने वालो में राम अवतार चौहान, रामवीर, सुनील कुमार, संजीव सक्सेना, सूरज कुमार, राजू शर्मा, मुन्ना कुमार, प्रिन्स रावत आदि व्यापारी शामिल रहे।

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