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Uttarakhand / Bageshwar : पंचायत मे लड़ी जा रही है बजट के वर्चस्व को लेकर लड़ाई

विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र का नया रूप देखना है तो चले आइये बागेश्वर जनपद की जिला पंचायत। जहां पर अपने ही सदन और अध्यक्ष के खिलाफ वित्तीय अनिमित्ताओं को लेकर पिछले 15जून से अनिश्चित कालीन धरने पर नौ सदस्य बैठे हैं, जिनका खबर लिखे जाने तक वागेश्वर जिला प्रशासन व जिला पंचायत प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया है। जहां विपक्ष व पक्ष एक दूसरे के आमने-सामने हैं।
आपको बताते चलें 1 दिसंबर 2019 को अध्यक्ष पद की शपथ लेने के बाद से लगातार चर्चाओं मे रही वागेश्वर जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव पर कई बार मनमानी करने के आरोप लग चुके हैं । पूर्व मे कई बैठके हंगामे की भेट चड़ती भी नजर आई। वहीं जिला पंचायत सदस्यों का कहना है कि सत्ता के नशे मे अध्यक्ष द्वारा विपक्ष के सदस्यों को बिना विश्वास मे लिए ही जनपद के विकास का खाका तैयार किया जाता रहा है। उन्हें नहीं मालूम की यह विकास किस ओर जा रहा है। उनके क्षेत्र के प्रस्ताव तक नहीं लिए जा रहे हैं और बजट का गलत तरीके से आंवंटन किया जा रहा है। जिसके खिलाफ उन्होने लगातार सदन के अन्दर विरोध व्यक्त किया पर उनकी एक न सुनी गई। जिसके चलते आंखिरकार उन्हे अध्यक्ष के इस मनमानी के खिलाफ आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ा।

धरने पर बैठे विपक्ष के सदस्यों ने बसंती देव पर आरोप लगाते हुए उन्हे वागेश्वर जनपद के इतिहास का रिमोट से चलने वाला पहला अध्यक्ष बताया। उन्होने कहा कि जिस दिन अध्यक्ष महोदया अपने मन से निर्णय लेने लगेंगी उस दिन सबकुछ सामान्य ढंग से चलने लगेगा। परन्तु यह आज हमारे साथ-साथ पूरे वागेश्वर जनपद के विकास के लिए दुर्भाग्य की बात है कि जिसका पहला व्यक्ति ही किसी और के इशारों पर चलता हो तो उससे किस प्रकार के विकास कि उम्मीद कि जा सकती है।

भंग नियोजित समिति कर रही है बजट पारित

बागेश्वर जिला पंचायत में दिनांक 07 जनवरी 2020 को नियोजन व अन्य समितियों का गठन किया गया था जिनका पंचायती राज एक्ट के अनुसार कार्यकाल दिनांक 06 जनवरी 2021 को स्वतः समाप्त हो चुका है। इसके बाद भी दिनांक 07 अप्रेल 2021 को जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव एवं अपर मुख्य अधिकारी डॉ सुनील कुमार द्वारा नियम विरुद्ध नियोजन समिति की वर्चुवल बैठक कराई गई जिसमे बजट प्रस्तावित किया गया और अध्यक्ष के विवेकाधीन 55 प्रतिशत तय कर लिया गया जिसे बिना सामान्य बैठक बुलाए बांकी धनराशि का वितरण भी कर दिया गया। जो पंचायतीराज एक्ट के नियमों के विरुद्ध है।
इस पर विपक्ष सदस्यों ने आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान समय मे जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव एवं अपर मुख्य अधिकारी डॉ सुनील कुमार द्वारा सदन को पंचायतीराज एक्ट के विरुद्ध संचालित किया जा रहा है। उन्होने कहा कि समितियों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी मात्र बजट की बंदर बाट करने की नियत से बिना सामान्य बैठक के विकास कार्यों मे खर्च होने वाले बजट की लूट मचाई जा रही है। जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जायेगा।

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पंद्रह करोड़ के सापेक्ष छ करोड़ चौवन लाख ही निर्माण कार्यों मे खर्च कर पायी जिला पंचायत अध्यक्ष

नव निर्वाचन के बाद से अब तक जिला पंचायत बागेश्वर अपने कुल बजट के सापेक्ष आधा भी खर्च नहीं कर पाई है। बागेश्वर जनपद के विकास मे निर्माण कार्य किस रफ्तार से आगे बड़ रहा है आप अंदाजा लगा सकते हैं। इसी बजट के बांटने को लेकर जिला पंचायत बागेश्वर मे पक्ष एवं विपक्ष मे वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी है। चर्चाओं का बाजार गरम है कि जहां सत्ता पक्ष की अध्यक्ष इसे अपने विवेकाधीन करके 2022 के चुनाओं के लिए संचित करना चाहती हैं। तांकी उस समय कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर कि जा सके, तांकी चुनाव जीता जा सके। वहीं विपक्ष के सदस्य इस पर सहमत नहीं हैं जिसके लिए उन्होने मोर्चा खोला हुआ है। विपक्ष का कहना है कि यह बजट क्षेत्र के विकास योजनाओं का बजट है कोई पार्टी फंड नहीं है जिसे अपनी मर्जी से ठिकाने लगा दिया जाए। इसका सभी सदस्यों मे समान वितरण होना चाहिए तांकी वह अपने क्षेत्र की विकास योजनों को आगे बढ़ा सके।
वर्तमान समय तक जिला पंचायत को राज्य वित्त व केन्द्रीय वित्त के मद से पंद्रह करोड़ पैंतालीस लाख सोलह हजार दो सौ बाईस रुपये प्राप्त हुए हैं। जिसके सापेक्ष छ करोड़ चौवन लाख अड़सठ हजार चार सौ अठाइस रुपये ही निर्माण कार्यों मे खर्च कर पायी जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव। अभी खबर लिखे जाने तक जिला पंचायत के पास पाँच करोड़ सतानब्बे लाख बारह हजार पाँच सौ छब्बीस रुपये अवशेष हैं। जिसके मनमाने वितरण को लेकर जिला पंचायत मे घमासान मचा हुआ है।

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एसपी साहब को बुलाने की बात को लेकर चड़ा सदस्यों का पारा

बीते शनिवार शाम को अपने कार्यालय पहुंची जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव ने जब वहां गेट पर ताला लटका देखा तो वह अपने क्रमचारियों से उसे खोलने को कहने लगी। तब वहीं बाहर धरने पर बैठे सदस्यों ने कहा मैडम यह तालाबंदी हमारे द्वारा की गई है फिलहाल जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाती हैं तब तक यह नहीं खोला जायेगा। इस पर अध्यक्ष महोदया भड़क उठी उन्होने कहा बुलाऊँ एसपी साहब को तब अकल ठिकाने आयेगी। जिस पर धरने मे बैठे सदस्य भड़क उठे। जिसके चलते काफी देर तक गहमागहमी का माहौल रहा। बाद मे उप जिलाधिकारी बागेश्वर व पुलिस उपाध्यक्ष नेमाहौल को संभाला। उन्होने अध्यक्ष व सदस्यों की मध्यस्ता कराने का प्रयास किया। जिस पर धरने मे बैठे सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे और अध्यक्ष अपनी बात को नियम संगत बताती रही। जिसके चलते कोई निर्णय नहीं निकाल पाया।
अध्यक्ष बसंती देव ने कहा कि सम्मानित सदस्य धरने पर बैठे हैं इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। यह न ही मुझे कुछ बताते हैं और न ही अपने क्षेत्र के विकास संबन्धित मांग लेकर मेरे पास आते हैं। इस पर धरने मे बैठी महिला सदस्यों मे से भैरुचौबट्टा कि सदस्या गोपा धपोला ने कहा कि “जब माननीय अध्यक्ष महोदया को धरने की जानकारी नहीं है तो बह जिला पंचायत के अधिकारी क्रमचरियों से कहें क्यूँ उन्हे जानकारी नहीं भेजी गई। उन्होने यह भी कहा कि जब से धरना चला है तब से लगातार अखबारों मे अध्यक्ष जी की ओर से बयान जारी कराने वाले के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए, इसकी जांच होनी चाहिए आंखिर अध्यक्ष जी को कौन बदनाम करना चाहता है।“

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इसी क्रम मे मंगलवार को अपर मुख्य अधिकारी डॉ सुनील कुमार, लेखाकर गोवर्धन दुम्का, वित्तीय परामर्शदाता धिरेश पाण्डे का तीन सदस्यीय दल धरना साथल पर सदस्यों से वार्ता करने पहुंचे। जहां अपर मुख्य अधिकारी डॉ सुनील कुमार को कोई जवाब देते नहीं सूझा। सदस्यों ने सारी नियमावली दिखाने को कही, उसके बाद नियमों की जानकारी मांगी तब सवाल पूछने पर तीनों आए अधिकारियों से जवाब देते नहीं बना तो अपर मुख्य अधिकारी डॉ सुनील कुमार बोले यह मेरा पहला अनुभव है आगे सब ठीक होगा। इस पर सदस्यों ने कहा कि जब आप बोलते हैं कि जो अध्यक्ष कहें वह मुझे करना पड़ता है तो आगे कैसे सब ठीक करेंगे। इन्ही सब बातों के साथ सदस्य लगातार अपनी मांग को लेकर जवाब मांगते रहे और सामने बैठे अपर मुख्य अधिकारी डॉ सुनील कुमार अपने मोबाईल फोन पर व्हात्सप्प चलते नजर आए। जब सामने से माँगपत्र पढ़ते सदस्य ने कहा कि आप तो अभी भी हमारी बात नहीं सुन रहे हैं तो आगे हम आपसे क्या उम्मीद करें, इस पर अपर मुख्य अधिकारी डॉ सुनील कुमार बोले मुझे लगा है कि आपने यह पत्र मुझे भेजा होगा। मैं उसे ढूंढ रहा था। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितने जिम्मेदार अधिकारी हैं हमारे पास जो धरने पर बैठे जनप्रतिनिधि की बात सीधे तरीके से नहीं सुन पा रहें हैं तो आम आदमी के साथ क्या हाल होता होगा?

प्रदेश मे जहां पंचायती राज विभाग स्वतंत्र रूप मे कार्य करता है। फिर भी इसके उच्चाधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही देखने को नहीं मिली है। वित्तीय अनिमित्ताओं के आरोप के बावजूद भी जिला अधिकारी बागेश्वर द्वारा कोई कार्यवाही दिखी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस पूरे मामले मे कोई निर्णय लिया भी जायेगा या सत्ता के दबाव मे सदस्यों को मनाया जायेगा। क्या क्षेत्र के विकास के लिए बड़ी-बड़ी बातों के साथ धरने पर बैठे सदस्य अपनी मांगे मनवाने में कामयाब रहते हैं या नहीं ?

राजकुमार सिंह